Friday, October 30, 2009

अभी हम वर्ल्ड चैंपियन नहीं : सचिन तेंदुलकर

मुंबई:.मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने एक साक्षात्कार में कहा कि ऑस्ट्रेलिया को उसी के मैदानों पर हराने का कारनामा भारत ने जरूर किया, लेकिन क्रिकेट पावर बनने के लिए हमें जीत को बरकरार रखना होगा।
इतना ही नहीं आने वाले समय में अन्य देशों को भी हराना होगा। पिछले साल वर्ल्डकप में हमारा प्रदर्शन खराब था लेकिन उसके बाद चीजें बदली हैं। वास्तव में टीम इंडिया अब ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा सशक्त बन चुकी है। टीम में युवा व प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जिससे कहा जा सकता है कि भारत क्रिकेट का सुपर पावर बन सकता है।




इतना ही नहीं आने वाले समय में अन्य देशों को भी हराना होगा। पिछले साल वर्ल्डकप में हमारा प्रदर्शन खराब था लेकिन उसके बाद चीजें बदली हैं। वास्तव में टीम इंडिया अब ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा सशक्त बन चुकी है। टीम में युवा व प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जिससे कहा जा सकता है कि भारत क्रिकेट का सुपर पावर बन सकता है।

न लारा न बुकानन:ब्रायन लारा ने हाल ही में कहा था कि उन्हें जॉन बुकानन ने उकसाया, जिसके जवाब में सचिन ने आक्रामक बल्लेबाजी की। इसपर सचिन ने कहा ,‘मैं कभी किसी को चुनौती देने या किसी के सामने कुछ साबित करने के लिए नहीं खेलता। मैं क्रिकेट खेलता हूं, क्योंकि इससे मेरा लगाव है। मेरा सपना देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना रहा है।’



मैं जिस समय मैदान पर होता हूं, पूरा ध्यान सिर्फ खेल और खेल पर होता है। यह कहना कि मैं किसी के कुछ कहने के कारण अच्छा खेला, मेरे लिए मुश्किल बात है।

धोनी की टीम सबसे अच्छी:महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया को मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अब तक के अपने कैरियर की सबसे उम्दा टीम मानते हैं। उनका यह भी मानना है कि यह टीम नंबर वन बनने की हकदार है। सचिन ने कहा, ‘यह टीम किसी भी चुनौती का सामना कर सकती है। टीम का दृष्टिकोण उच्च स्तरीय और स्पर्धात्मक है।’



‘टैेस्ट क्रिकेट में वनडे की तुलना में अलग टेम्परामैंट की जरूरत होती है। हमारे दोनों ही कप्तान खेल के दोनों रूपों के लिए फिट हैं। खेल के जिस रूप में जैसी मांग होती है। मैं वैसे ही खेलता हूं।’
खेल का उम्र से क्या लेना:करीब 18 साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर ने अलग-अलग कप्तानों के साथ खेला है। इस बारे में सचिन ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय मैचों में उम्र का खेल से कोई लेना-देना नहीं होता है। प्रदर्शन का महत्व होता है।’ सचिन ने कहा है कि हॉकी खिलाड़ियों को इस समय आलोचना नहीं समर्थन देने की जरूरत है।








अभी हम वर्ल्ड चैंपियन नहीं : सचिन तेंदुलकर

Wednesday, October 28, 2009

सचिन तेंदुलकर का इतिहास




पूरानाम
          =                 सचिन रमेश तेंदुलकर
जन्म
          =              24 अप्रैल 1973 मुंबई , भारत
      
उपनाम  -          =             लिटिल मास्टर, मास्टर ब्लास्टर, द मास्टर, द लिटिल चैंपियन                  बल्लेबाजी की शैली              दाएं हाथ का बल्लेबाज़


तेंदुलकर के खिलाफ टिप्पणी पर कांबली का खंडन


 पूर्व भारतीय क्रिकेटर विनोद कांबली ने इस बात का खंडन किया कि उन्होंने बचपन के दोस्त सचिन तेंदुलकर पर पर्याप्त मदद नहीं करने का आरोप लगाया है। कांबली ने कहा कि इन खबरों से वह और उनका परिवार सकते में है। शारदाश्रम स्कूल में तेंदुलकर के साथ पढे कांबली ने कहा कि उन्होंने कभी रियलिटी टीवी शो में सचिन के खिलाफ कुछ नहीं बोला और ये रिपोर्ट ‘पूरी तरह से बेबुनियाद’ है। उन्होंने कहा कि मैने कभी तेंदुलकर के बारे में कुछ नहीं कहा। वह 26 साल से मेरा दोस्त है। लोगों को पता होना चाहिये कि अपने दोस्त के बारे में ऐसा मैं कभी नहीं कहूंगा। वह अभी लंदन में है और मैं उससे जल्दी मिलूंगा। इस पूर्व बल्लेबाज ने इस रिपोर्ट से तेंदुलकर और उसके परिवार को हुई असुविधा के लिये माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि हमारे पारिवारिक संबंध बहुत अच्छे हैं। मैं और मेरे बहुत से दोस्त इस खबर से स्तब्ध हैं। यह पूछने पर कि ऐसी रिपोर्ट कहां से आई, कांबली ने कहा कि मुझे नहीं पता लेकिन यह निराधार है। मैं इसकी निंदा करता हूं। मैं प्रचार के लिये कुछ नहीं करता। मुझे पता है कि लोग मुझे प्यार करते हैं। मैं सस्ती लोकप्रियता नहीं चाहता। टीवी पर एक रियलिटी शो में 37 वर्षीय कांबली ने कहा है कि तेंदुलकर ने उस समय उसकी मदद नहीं की जब व

एक थप्पड़ जिसने बनाया सचिन तेंदुलकर



सर्वकालीन महान बल्लेबाजों में से एक सचिन तेंदुलकर आज सचिन नहीं होते यदि उनके गुरू रमाकांत आचरेकर ने उन्हें एक दिन थप्पड़ ना मारा होता.



यह बात स्वयं सचिन ने स्वीकार की. नागपुर में एक समारोह के दौरान रमाकांत आचरेकर फाउंडेशन को पाँच लाख रुपए दिए गए. इस मौके पर मास्टर ब्लास्टर ने कहा कि मैंने आचरेकर से बहुत कुछ सीखा और उनकी मदद से ही मैं अपना सफर तय कर सका.





उन्होने एक घटना याद करते हुए कहा कि जब वे 12 साल के थे तो एक बार दादर के शिवाजी पार्क में एक मैच के दौरान  अपना मैच छोड़कर सीनियर खिलाडियों का मैच देखने चले गए थे. यह बात जब आचरेकर को शाम को मालूम हुई तब उन्होंने मुझे बुलाया और एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया. इससे मैने बहुत कुछ सीखा और क्रिकेट के प्रति समर्पित हुआ.

सचिन तेंदुलकर से एक मुलाकात




 सचिन तेंदुलकर से एक मुलाकात 
आपके लिए आज़ादी का क्या मतलब है?
देखिए मेरी उम्र 34 साल है और मै अभी लोगों को आज़ादी का मतलब सिखाने लायक नहीं हूँ. लेकिन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने कड़े संघर्ष के बाद हमें आज़ादी दिलाई जिसकी हमें कीमत समझनी चाहिए.
आज आप एक तरह से देश की पहचान बन चुके हैं. जब आप देश के झंडे वाली कैप पहनकर मैदान में उतरते हैं तो कैसा महसूस होता है?
एक ज़िम्मेदारी सी ज़रूर महसूस होती है, दबाव रहता है कि बेहतर उदाहरण पेश करना है. लेकिन मेरा मानना है कि सिर्फ़ क्रिकेट खेलते वक्त ही भारतवासी होने की भावना रखने की बजाय हमें हमेशा अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने की ही कोशिश करनी चाहिए.
भारतवासी होने के नाते मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि देश का नाम ऊंचा रहे. फ़िर चाहें मैं क्रिकेट खेलूँ या घूमने जाऊँ हमेशा ही यह बात मेरे दिल में रहती है. मेरा मानना है कि यह ज़िम्मेदारी हर एक भारतीय की है. 
  
















 आज़ाद भारत की प्रगति कैसी रही. देश ने कितनी तरक्की की..? 
देखिए, मैं पहले ही कह चुका हूँ कि मैं यह बता पाने के लिए काफ़ी छोटा हूँ. लेकिन एक आम आदमी के तौर पर मैं कह सकता हूँ कि हमारे देश ने आज़ादी के बाद से काफ़ी तरक्की की है.
यह तरक्की पिछले दस सालों में ज़बरदस्त तरीके से हुई है और मुझे इस बात में कोई शक़ नहीं कि आने वाले सालों में भारत चोटी के 20 देशों में शुमार होगा. हम सब देशवासियों के सामने आज यह एक बड़ी ज़िम्मेदारी है
.आपके लिए तिरंगे का क्या मतलब है? आपमें तिरंगे के प्रति बेहद लगाव देखा गया है. यहां तक कि आपके किट बैग में भी हमेशा तिरंगा रहता है?
तिरंगा मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है. भारत ने मुझे सब कुछ दिया है. इसके बिना मैं कुछ भी नहीं. लेकिन तिरंगे के लिए मुझे कोई भी शब्द समझ में नहीं आ रहे...जब भी तिरंगा लहराया जाता है या राष्ट्रगान की धुन बजती है तो मेरे रौंगटे खड़े हो जाते हैं.













22 विश्व रिकॉर्डों के बादशाह हैं सचिन तेंदुलकर



सचिन के नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कई विश्व रिकॉर्ड हैं


अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कीर्तिमानों के अंबार लगाने वाले अनुभवी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर इस खेल में दो चार नहीं बल्कि 22 विश्व रिकॉर्डों के बेताज बादशाह हैं। सचिन ने हाल में कोलंबो में समाप्त हुई त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में भारत को खिताबी जीत दिलाने में अपना 44वां एकदिवसीय शतक लगाया था जिसके बाद स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि सचिन के नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कितने विश्व रिकॉर्ड हैं। सचिन के 19 वर्ष की क्रिकेट महागाथा के ये विश्व रिकॉर्ड इस प्रकार हैं


             टेस्ट क्रिकेट सर्वाधिक रन



टेस्ट क्रिकेट- सर्वाधिक रन- 12473, सर्वाधिक शतक- 42, सर्वाधिक 50 के स्कोर- 95 (42 शतक और 53 अर्धशतक) सर्वाधिक चौके- 1676
              एकदिवसीय क्रिकेट सर्वाधिक रन
एकदिवसीय क्रिकेट- सर्वाधिक रन - 16895, सर्वाधिक शतक- 44, सर्वाधिक 50 के स्कोर 135 (44 शतक और 91 अर्धशतकएक
              कैलेंडर वर्ष सर्वाधिक रन
 कैलेंडर वर्ष सर्वाधिक रन - 1894 रन (1998 में), एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक शतक- नौ शतक (1998 में)
              एक विश्वकप में सर्वाधिक रन

एक विश्वकप में सर्वाधिक रन  - 6र73 रन (2003 के विश्वकप में)
              एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक शतक


एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक शतक- ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ आठ-आठ शतक
              सर्वाधिक मैन ऑफ द मैच


सर्वाधिक मैन ऑफ द मैच- 59, सर्वाधिक प्लेयर ऑफ द सीरीज- 14 (टेस्ट, एकदिवसीय और 20-20)
             सर्वाधिक मैच
सर्वाधिक मैच- 588, सर्वाधिक रन- 29678, सर्वाधिक शतक- 86, सर्वाधिक 50 के स्कोर- 230, सर्वाधिक चौके- 3517
सचिन तेंदुलकर को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए 20 साल हो चुके हैं लेकिन इतने लंबे रिश्ते के बावजूद इस खेल से उनकी मोहब्बत कम होने के बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही है। सचिन का इस खेल से लगाव करीब ढाई दशक पुराना है। लेकिन वक्त की सलवटें भी उन्हें इस प्यारी चीज से दूर नहीं कर पायी हैं। स्थिति तो यह हो गयी है कि सचिन की क्रिकेट के साथ चल रही मोहब्बत लगातार परवान चढ़ती जा रही है।

रिकॉर्डों के बादशाह सचिन का सिर्फ क्रिकेट में नहीं बल्कि इसके अलावा उनके कुछ अनोखे कारनामे भी हैं। जैसे कि लंदन में मोम की प्रतिमा बनाने वाली मैडम टुसॉड्स म्यूजियम ने क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की मोम प्रतिमा बनाई। सचिन की ये प्रतिमा मैडम टुसॉड्स म्यूजियम के खेल विभाग में रखी गई है जहां खेल जगत की कई महान हस्तियां जैसे मोहम्मद अली, डेविड बेकहम, टाइगर वुड्स और शेन वॉर्न पहले से ही मौजूद हैं।

सचिन न सिर्फ क्रिकेट जगत में रिकॉर्डों के बेतजाज बादशाह हैं, बल्कि वे अभी भी अपने साथी क्रिकेटरों की अपेक्षा सर्वाधिक टैक्स देने वाले खिलाड़ी हैं। सचिन सिर्फ क्रिकेट खेलते ही नहीं हैं बल्कि इसके भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं। ट्वेंटी-20 के आगमन से एकदिवसीय के अस्तित्व पर मंडरा रहे गंभीर खतरे पर सचिन ने 50 ओवर के प्रारूप को बचाने के लिए इसे 25-25 ओवरों की चार पारियों में बांटने का सुझाव दिया। सचिन के इस विचार को क्रिकेट जगत ने स्वागत किया है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) जहां सचिन के इस सुझाव से सहमत हुई है वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर कपिल देव ने इसे बकवास बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया।

सचिन की महानता यह भी है कि वे अपने साथी खिलाड़ियों को भी क्रिकेट के गुर सीखाते रहते हैं। हाल ही में एनसीए में आयोजित अभ्यास शिविर के दौर भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना को शॉर्टपिच गेंदें को खेलने में हो रही परेशानी से उबरने के उपाय बताए। सचिन सिर्फ भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को ही नहीं बल्कि विदेशी खिलाड़ियों को भी नुस्खे देते रहते हैं। कुछ दिनों पहले ऑस्ट्रेलिया के युवा सलामी बल्लेबाज फिलिप ह्यूज को टिप्स दिए।







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